अनिद्रा

अनिद्रा: कारण, उपचार व आहार || Insomnia: Causes & Treatment

मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, जो काम कम करता है तथा सोचता अधिक है, उसे अनिद्रा का रोग होता है। यह बड़ा कष्टदायक रोग है। यदि स्थिति अधिक देर तक बनी रहे, तो व्यक्ति पागल होने की स्थिति में पहुंच सकता है। जो व्यक्ति दिन भर काम करता है, उसे रात में 7 8 घंटे नींद अवश्य आनी चाहिए। जब हम सोते हैं, तो शरीर शिथिल रहकर अपनी दिन भर की टूट-फूट की मरम्मत कर व पूरी शक्ति ग्रहणकर सुबह फिर काम करने की स्थिति में आ जाता है।

हमारा शरीर छोटे-छोटे कोषाणुओं से बना है। काम करते, चलते-फिरते, सोचते, विचार करते वे टूटते हैं। फलतः हमारा शरीर तथा मन थकता है। वह सब थकावट निश्चिंत सोने से दूर होती है। यह शरीर की बड़ी महत्त्वपूर्ण क्रिया है। यह शरीर का आहार है और मानसिक स्वास्थ्य के लिए टौनिक भी। इससे नए कोषाणुओं का निर्माण हो जाता है और शरीर का विकार शरीर से बाहर हो जाता है।

जब शरीर की मरम्मत नहीं होती और शरीर का विकार शरीर से बाहर नहीं होता, तो शरीर में कई प्रकार रोग घर कर जाते हैं। एक रात पूरी नींद न लेने से दूसरे दिन पूरे मन तथा शक्ति से हम लोग काम करने की स्थिति में नहीं रहते। दिनभर शरीर थका थका रहता है, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है और मन तनाव से भर जाता है।

नींद कैसे आती है:

क्या आप जानते हैं कि हमें नींद कैसे आती है और नींद के मध्य हमारे शरीर में क्या होता है? वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, हमारे मस्तिष्क में एक बहुत ही जटिल क्षेत्र होता है, जिसे ‘निद्रा केंद्र’ कहते हैं। रक्त में मिला हुआ कैल्सियम इस ‘निद्रा केंद्र’ को नियंत्रित करता है। जब कैल्सियम की एक निश्चित मात्रा रक्त द्वारा इस केंद्र तक पहुंचा दी जाती है, तो हमें नींद आ जाती है। इस स्थिति में ‘निद्रा केंद्र’ मस्तिष्क से आने वाले नाड़ी-सूत्रों का संबंध शरीर के शेष अंगों से समाप्त कर देता है, जिससे हमारी इच्छाशक्ति और चेतना अस्थायी तौर पर समाप्त हो जाती है।

सोते समय हमारा शरीर अनेक हरकतें करता है। हम नींद में कई बार करवट बदलते हैं। हमारा रक्त-संचार जारी रहता है। हृदय की धड़कन कुछ धीमी पड़ जाती है, परंतु पाचन क्रिया अपनी सामान्य स्थिति में होती है। यकृत (लिवर) तथा गुर्दे अपना काम करते रहते हैं। नींद की अवस्था में आवाज, प्रकाश, गर्मी और गंध की प्रतिक्रिया हर व्यक्ति पर एक-सी होती है। नींद में हमारे शरीर का तापमान भी एक डिग्री कम हो जाता है।

नींद न आने के तीन बड़े कारण है:
1. मस्तिष्क में रक्त की वृद्धि
2. स्नायु की उत्तेजना
3. इन दोनों के मेल से पैदा हुई परेशानी

उपचार:

आम तौर पर अनिद्रा का रोगी रात में नींद न आने के कारण सुबह देर तक बिस्तर पर पड़ा रहता है। इसका सबसे अच्छा उपचार है सुबह सूर्य निकलने से एक घंटा पहले उठ जाना, शौच आदि से निवृत्त होकर जल नेति करना और पास के खुले पार्क में सैर तथा व्यायाम करना। तेज चलकर सैर करें और योगाभ्यास कर मन की उत्तेजना शांत करें। स्नायु दौर्बल्य रोग में जो आसनों का क्रम बताया गया है, उन्हीं का अभ्यास करें तथा प्राणायाम करें। सर्दियों में सूर्यभेदी प्राणायाम लाभ देता है।

इस रोग में गर्म पांव का स्नान 20 मिनट तथा शरीर रगड़-रगड़कर ठंडे पानी से स्नान करना विशेष लाभ देता है। गर्म पांव का स्नान रात में सोते समय लेना चाहिए।

खुले हवादार स्थान पर सोने से अच्छी नींद आती है। स्नायु दुर्बलता वाले रोग में बताए अन्य उपचारों को भी अपने समय अनुसार कर सकते हैं।

बिस्तर पर सोते समय 10 मिनट केवल अपने श्वास को आता जाता हुआ देखें। इससे मन विचारशून्य होता है और नींद आती है।

आहार:

इसमें हल्का सुपाच्य तथा संतुलित आहार लेना चाहिए। जैसी आहार-व्यवस्था नाड़ी दौर्बल्य रोग में बताई गई है, उसे अपनी भूख अनुसार चलाएं।
चाय, कॉफी, सिगरेट, शराब आदि यदि लेते हों, तो उसे छोड़ देना चाहिए। नींद की गोलियां भी बंद कर देनी चाहिए। थोड़े दिन परेशानी होगी। फिर नींद स्वतः ही आने लगेगी और आप राहत अनुभव करेंगे।