खनिज लवण

Benifits And Sources Of Minerals

‘शरीर-यंत्र’ के परिचालन में खनिज लवणों का बहुत बड़ा हाथ है। जैसे शरीर की मांस पेशियों और स्नायुओं की कार्यक्षमता को बनाए रखना, हृदय को नियमित गति देना। शरीर के सभी तंतुओं के भीतर रक्त आदि विभिन्न जलीय पदार्थों का प्रवेश और उनका बाहर निकलना इत्यादि। रक्त के लाल कणों में सूक्ष्म मात्रा में जो लोहा रहता है, वह रक्त को शुद्ध रखने में समर्थ होता है।

खनिज लवणों का इतना महत्त्व है कि यदि भोजन इन लवणों से रहित हो, तो कोई भी 20 – 25 दिन से अधिक जीवित नहीं रह सकता। ये लवण दांत और हड्डियों में विशेष रूप से रहते हैं, परंतु प्रत्येक जीवकोश में भी प्रत्येक लवण सूक्ष्म रूप से रहता है। इन खनिज लवणों को शरीर भोजन के द्वारा ग्रहण करता है।

मनुष्य के शरीर में कैल्सियम, फासफोरस, सोडियम, पोटैशियम, लोहा, आयोडीन, गंधक और मैग्नेशियम के यौगिक प्रधान खनिज लवण होते हैं। थोड़ी मात्रा में मैगनीज, तांबा, जस्ता, कोबाल्ट, फ्लोरीन, क्लोरीन, जिंक, सीसा आदि भी रहते हैं।

कैल्सियम (Calcium):

शरीर को सबसे अधिक कैल्सियम चाहिए। यह दांतों और हड्डियों का प्रधान घटक है। इसका एक प्रतिशत भाग रक्त तथा अन्य स्थानों में रहता है, किंतु रक्त के भीतर रहकर ऐसा अद्भुत कार्य करता है कि उसके हृत्पिंड के फैलने और सिकुड़ने में समर्थ होता है। रक्त में थक्का जमाने की क्षमता भी कैल्सियम के कारण होती है। यह पोटैशियम, सोडियम और मैग्नेशियम के साथ मांसपेशियों में संकुचन उत्पन्न करता है, जिससे सभी अंगों में हरकत हो पाती है। यह एंजाइम निर्माण में भी मदद पहुंचाता है।

प्राप्ति के साधन:

यह दूध, तिल, पालक, मेथी, चौलाई, सोयाबीन, सूखे मेवे, आंवला, गाजर, और पनीर में पाया जाता है।

फासफोरस (Phasphorus):

दांतों, हड्डियों और स्नायुओं के लिए यह एक मुख्य घटक है। यह शरीर की वृद्धि और पुष्टि के लिए भी आवश्यक होता है। पाचक रस की क्रियाशीलता से इसका गहरा संबंध है। कार्बोज और चर्बी, जातीय भोजन के पक्वीकरण में विशेष रूप से सहायता करता है।

प्राप्ति के साधन:

फासफोरस खमीर व चोकर सहित आटा, हाथ से कुटे चावल और सोयाबीन में अधिक मात्रा में पाया जाता है। इनके अतिरिक्त तिल, चना, मूंगफली, गाजर, सलाद के पत्ते, हरे साग, दालों और सूखे मेवों में भी यह कुछ मात्रा में पाया जाता है। जिनके शरीर को कैल्सियम और फासफोरस विशेष रूप से चाहिए उन्हें संतरा, मौसमी, नीबू आदि फल लेने चाहिए।

सोडियम (Sodium):

सोडियम आमाशय में बनने वाले पाचक अम्ल रस (हाइड्रोक्लोरिक एसिड) के उत्पादन में सहायता करता है। यह शरीर को विषमुक्त रखने में सहयोग देता है। इसकी कमी से गुर्दों में पथरी बनने की आशंका रहती है। इसके लवण जल अन्य हरी सब्जियों से भी प्राप्त होते रहते हैं। यह ग्लूकोज को कोशिकाओं में भेजने में सहायक होता है। इसकी कमी से हाथ-पांव में ऐंठन आ जाती है, जी मिचलाने लगता है और उल्टी हो जाती है।

जो नमक हम खाते हैं, वह सोडियम क्लोराइड होता है।

पोटैशियम (Potassium):

पोटैशियम शरीर के सभी कोशों का आवश्यक घटक है। यह मांसपेशियों के गठन में सहायता करता है और तंतुओं के लचीलेपन को बनाए रखता है। स्नायुमंडल के संचालन में इसका विशेष महत्त्व है। यह हृदय की मांसपेशियों में संकुचन पैदा करने में सहायता देता है, जिससे रक्त संचालन ठीक से होता रहता है। इसकी कमी से मानसिक अवसाद तथा चिड़चिड़ापन आता है और प्रोटीन का ठीक से पक्वीकरण नहीं होता।

प्राप्ति के साधन :

अनाज, दालें, सभी जड़ वाली सब्जियां, दूध, दही, छाछ, पनीर, सोयाबीन आदि में पाया जाता है।

लोहा (Iron) :

शरीर में लोहे की मात्रा सूक्ष्म होती है, परंतु यह शरीर के लिए बहुत उपयोगी होती है। शरीर के लाल रक्त कणों का प्रधान घटक यही होता है। इसकी कमी से रक्तहीनता रोग हो जाता है।
लोहा रक्त में लाल कणों (हीमोग्लोबिन) से ओषजनीकरण के कारण उत्पादित कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन अवांछित पदार्थों को अपने भीतर विश्लेषण कर फेफड़ों, गुर्दों और त्वचा में पहुंचाकर शरीर से बाहर निकालता है।

लोहे की कमी से अवयवों के गठन में शिथिलता, शरीर की कमजोरी, थकान, भूख की कमा, श्वास फूलना, हृदय धड़कन की शिकायत, चेहरा पीला और हाथ-पैरों में सूजन इत्यादि दोष उत्पन्न हो जाते हैं।

प्राप्ति के साधन :

हर प्रकार के हरे साग, धनिया, पुदीना, चोकर, चावल की भूसी, दालों के छिलके, सूखे मेवों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। कुछ मात्रा फालसे, सेब, चुकंदर, बैगन, काले तिल में पाई जाती है।

आयोडीन (Iodine):

आयोडीन पाचन क्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह भोजन के आत्मीकरण में तीव्रता लाता है। कैरोटीन को विटामिन ‘ए’ में बदलने में सहायता करता है।

थायराइड ग्रंथि के अंत:स्राव का प्रधान घटक आयोडीन ही है। भोजन में इसका अभाव होने से यह ग्रंथि बड़ी हो जाती है। आयोडीन के अभाव से विभिन्न स्नायुविक तथा मानसिक रोग हो जाते हैं और शरीर में अधिक मोटापा आ जाता है।

प्राप्ति के साधन :

यह हरी साग-सब्जियों, अदरक, जल में पाया जाता है।

मैग्नेशियम:

यह भी कैल्सियम और फासफोरस की भांति शरीर को कार्य करने में सहयोग प्रदान करता है। यह हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए और स्नायुविक यंत्रों की शक्ति को स्थिर रखने के लिए आवश्यक है।

प्राप्ति के साधन :

पनीर, दूध, अखरोट, गाजर, टमाटर, आलू, आदि में पाया जाता है।

मैगनीज:

यह त्वचा, यकृत, हड्डियों, क्लोम ग्रंथि और बालों में पायो जाता है। यह स्नायुओं को सबल करता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और शरीर के विष को नष्ट करता है।

गंधक (Sulphur):

गंधक खून को साफ करता है और यकृत की कार्यक्षमता को स्थिर रखता है। भोजन में प्रोटीन उचित मात्रा में हो, तो इसका अभाव नहीं रहता। यह हमारी हर एक कोशिका में रहता है।

प्राप्ति के साधन :

गेहूं का अंकुर, पनीर, मसूर, सेम की फली, मूंगफली, हरी साग-सब्जियों, दालों और बादाम में भी कुछ मात्रा में पाया जाता है।

तांबा (Copper):

तांबे की आवश्यकता अति सूक्ष्म मात्रा में होती है, जो खाद्य-पदार्थों से मिल जाती है। जिन पदार्थों में लोहा होता है, उनमें कुछ मात्रा में तांबा भी रहता है।

प्राप्ति के साधन:

यह हरी साग-सब्जियों, केला, संतरा और नाशपाती में पाया जाता है।

जस्ता (Aluminium):

जस्ता कई हार्मोन तथा एंजाइमों का घटक है। यह लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है। यह भी सामान्य आहार से प्राप्त हो जाता है।

प्राप्ति के साधन :

विशेषकर गेहूं के चोकर और अंकुर में पाया जाता है।

क्लोरीन (Chlorine):

क्लोरीन आमाशय (पाकस्थली) के पाचक रस के लिए आवश्यक है । यह पाचन में भी सहायता करता है। शरीर को विषमुक्त करता है और जोड़ों की जड़ता को नष्ट करता है।

प्राप्ति के साधन :

यह पालक, सलाद पत्ता, बंदगोभी, खीरा, टमाटर, केला, खजूर आदि में पाया जाता है।

सभी खनिज लवण पानी में घुल जाते हैं। जब सब्जी को छील, काटकर धोते हैं या उबालकर उसका पानी फेंक देते हैं, तो सारे लवण पानी में बह जाते हैं। इसलिए यह अच्छा है कि हरी सब्जियों का कच्चा रस और ताजे फलों का रस लें, जिससे आवश्यक खनिज लवण समुचित मात्रा में शरीर को मिल सकें।

नोट :

कैल्सियम, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नेशियम, मैगनीज, कोबाल्ट, लोहा, जस्ता, तांबा आदि धातुएं मौलिक तत्व हैं। ये शुद्ध रूप में नहीं खाए जा सकते। खाद्य पदार्थों में इसके रासायनिक यौगिक होते हैं, जिन्हें खनिज लवण कहते हैं। गंधक और आयोडीन अधातुएं हैं। इनका उपयोग शुद्ध रूप में और यौगिकों के रूप में होता है। क्लोरीन और फ्लोरीन गैसें हैं। धातुओं और अधातुओं के रासायनिक संयोग से इनके अनेक यौगिक बन जाते हैं, जो क्लोरेट और क्लोराइड तथा फ्लोरेट और फ्लोराइड कहलाते हैं।